मार्शल अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना का पहला फाइव स्टार अधिकारी
अर्जन सिंह इंडियन एयरफोर्स के इकलौते ऐसे अफसर हैं, जिन्हें वर्ष 2002 में फाइव स्टार रैंक प्रदान किया गया. यह पद इंडियन आर्मी के फील्ड मार्शल पद के बराबर है. अपने एयरफोर्स की सेवा के दौरान अर्जन सिंह ने 60 अलग-अलग तरह के लड़ाकू विमान उड़ाये. इंडियन एयरफोर्स को दुनिया की चौथी सबसे बड़ी व सशक्त एयरफोर्स बनाने में अर्जन सिंह की बेहद अहम भूमिका रही है.
19 वर्ष में पायलट ट्रेनिंग के लिए चुने गये
उनका जन्म 15 अप्रैल 1919 को लायलपुर (अब पाकिस्तान में फैसलाबाद) में हुआ था। सिर्फ 19 वर्ष की आयु में, उनका चयन आरएएफ कॉलेज, क्रैनवेल में ट्रेनिंग के लिए हुआ था। जिसके बाद दिसंबर 1939 वो रॉयल इंडियन एयर फोर्स में पायलट के तौर पर कमीशन हुए। अर्जन सिंह को उनके उत्कृष्ट नेतृत्व, महान कौशल और साहस के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) से सम्मानित किया गया था।
आजादी के पहले जश्न में मिला अनूठा सम्मान
15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तब अर्जन सिंह को भारतीय वायुसेना के सौ से अधिक विमानों के फ्लाई-पास्ट का नेतृत्व करने का अनूठा सम्मान दिया गया। 44 वर्ष की आयु में अर्जन सिंह ने 01 अगस्त 1964 को एयर मार्शल की रैंक पर भारतीय वायुसेनाध्यक्ष का पद संभाला। विश्व में बहुत कम वायुसेनाध्यक्ष होंगे जिन्होंने 40 साल की उम्र में या पद संभाला होगा और 45 साल की उम्र में रिटायर हो गए हों।
वायुसेना से रिटायर होकर निभाईं कई जिम्मेदारियां
मार्शल अर्जन सिंह को रिटायरमेंट के बाद पहले स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत बनाया गया। जिसके बाद उन्हें कीनिया में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर नियुक्त किया गया। वो अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य भी रहे और दिल्ली के उप राज्यपाल की जिम्मेदारी भी संभाली। भारत और पाकिस्तान के बीच साल 1965 की जंग के दौरान अर्जन सिंह को उनके नेतृत्व के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। अर्जन सिंह भारतीय वायु सेना के पहले एयर चीफ मार्शल बने। जुलाई 1969 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना की बेहतरी और कल्याण के लिए अत्यधिक योगदान देना जारी रखा।
मार्शल अर्जन सिंह के जीवन की विशेष उप्लब्धियां
महज 20 साल की उम्र में रॉयल इंडियन एयर फोर्स को पायलट के तौर पर ज्वाइन किया
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान विशिष्ट फ्लाइंग क्रॉस (डीएफसी) से किए गए सम्मानित
महज 40 साल की उम्र में संभाला वायुसेनाध्यक्ष का पद
स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत के तौर पर भी निभाई जिम्मेदारी
1965 की जंग में कुशल नेतृत्व के लिए मिला पद्म विभूषण सम्मान
भारतीय वायु सेना के पहले एयर चीफ मार्शल
साल 2002 में वायु सेना के मार्शल के पद से किए गए सम्मानित
2002 में उन्हें वायु सेना के मार्शल के पद से सम्मानित किया
सम्मान में वायु सेना स्टेशन पानागढ़ का नाम बदलकर वायु सेना स्टेशन अर्जन सिंह किया गया
वायु सेना के पहले फाइव स्टार रैंक अधिकारी
भारतीय सेना में किन अधिकारियों को स्टार रैंकिंग दी जाती है
17 सितम्बर, 2017 को भारतीय वायु सेना के पूर्व प्रमुख और मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स के पद से सम्मानित अर्जन सिंह का निधन हो गया. 98 वर्षीय अर्जन सिंह मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स के पद से सम्मानित होने वाले पहले सैन्य अधिकारी थे. भारत में मार्शल ऑफ इंडियन एयर फोर्स का पद 5 स्टार रैंक वाला पद है और यह भारतीय वायु सेना का सर्वोच्च पद है. इस लेख में हम भारत की तीनों सेनाओं (थल सेना, नौसेना और वायु सेना) के उन पदों का विवरण दे रहे हैं, जिस पद पर सुशोभित व्यक्ति को क्रमशः 5 स्टार, 4 स्टार, 3 स्टार, 2 स्टार एवं 1 स्टार रैंक से सम्मानित किया जाता है.
सेना में क्या होती है 5 स्टार रैंक, जानिए कौन होते हैं मार्शल और फील्ड मार्शल?
सैन्य परिवार में जन्मे अर्जन सिंह भारतीय वायुसेना के एकमात्र ऐसे अफसर थे, जिन्हें फाइव स्टार रैंक के साथ मार्शल (सेना में फील्ड मार्शल के बराबर) का ओहदा दिया गया था। तीनों सेनाओं में फाइव स्टार रैंक के अधिकारी कभी रिटायर नहीं होते। ये एक सम्मान का पद होता है।
भारतीय सेना के लिए मिसाल माने जाने वाले अर्जन सिंह ने 1965 में सबसे युवा वायु सेना प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाली थी। उस समय उनकी आयु महज 45 वर्ष थी। अर्जन सिंह के अंदर लड़ाकू पायलट का जज्बा आखिरी तक बरकरार रहा। 1969 में रिटायरमेंट तक वह सेना के 60 तरह के विमान उड़ा चुके थे।
इंडियन आर्मी में फील्ड मार्शल का पद एक सम्मान के तौर पर दिया जाता है। सेना का सबसे बड़ा पद जनरल ऑफ चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ का होता है। आर्मी में अर्जन सिंह से पहले दो ही अफसरों को फील्ड मार्शल की रैंक दी गई थी। ये 5 स्टार रैंक फील्ड मार्शल सैम मानेक शॉ और फील्ड मार्शल एम करियप्पा को ही दिया गया है।
1971 में पाक के खिलाफ युद्ध के बाद जनरल सैम मानेक शॉ को 1973 में पहला फील्ड मार्शल बनाया गया। वहीं दूसरी ओर 1986 में जनरल के एम करियप्पा को दूसरा फील्ड मार्शल बनाया गया। आर्मी की तरह ही भारतीय वायुसेना में भी इसी तरह का एक सम्मान का पद मार्शल ऑफ एयरफोर्स बनाया गया। 2002 तक देश में कोई मार्शल ऑफ एयरफोर्स नहीं था।
2002 में मार्शल अर्जन सिंह को ये पहला सम्मान दिया गया। अब तक वायुसेना में सबसे बड़ा पद वायुसेनाध्यक्ष का था, जिसे एयर मार्शल कहा जाता है। एयर मार्शल के कंधे पर जहां 4 स्टार होते हैं वहीं मार्शल ऑफ एयरफोर्स के कंधे पर 5 स्टार लगाए जाते हैं। मार्शल अर्जन सिंह देश के पहले मार्शल ऑफ एयरफोर्स बनाए गए।
वायुसेना और आर्मी की तरह ही नौसेना में भी इसी तरह एक सम्मान का पद एडमिरल ऑफ फ्लीट बनाया गया। हालांकि अब तक भारतीय नौसेना में ये सम्मान किसी को नहीं दिया गया है।
वायुसेना में होती हैं ये 16 रैंक
वायुसेना में होती हैं ये 16 रैंक, सबसे बड़े होते हैं ये अधिकारी, यही कहलाते हैं इंडियन एयरफोर्स के प्रोफेशनल हेड
ये होते हैं इंडियन एयरफोर्स के कमीशन्ड ऑफिसर
रैंक : मार्शल ऑफ द एयरफोर्स
- मार्शल ऑफ द एयरफोर्स इंडियन एयरफोर्स की हाइएस्ट रैंक है। यह युद्ध के दौरान मिलने वाली एक पदवी है। यह फाइव-स्टार रैंक है। कई देशों में इस तरह की रैंक है लेकिन सभी इसका यूज नहीं करते। मार्शल ऑफ द एयरफोर्स अर्जन सिंह, आईएएफ में एकमात्र मार्शल ऑफ द एयरफोर्स रहे हैं।
रैंक : एयर चीफ मार्शल
- यह इंडियन एयरफोर्स की दूसरी सबसे बड़ी रैंक है। यह फोर स्टार रैंक होती है। सिर्फ एयर चीफ मार्शल ही चीफ ऑफ द एयर स्टाफ (CAS) की पोजिशन लेते हैं। यह इंडियन एयरफोर्स के प्रोफेशनल हेड और कमांडर होते हैं।
रैंक : एयर मार्शल
- इंडियन एयरफोर्स में यह तीसरी रैंक होती है। इस पर काफी सीनियर अधिकारी काबिज होते हैं।
रैंक : एयर वाइस मार्शल
- यह टू स्टार रैंक होती है।
रैंक : एयर कॉमडोर
- यह स्टार कैटेगरी की सबसे जूनियर रैंक है। यह एक सिंगल स्टार रैंक होती है।
रैंक : ग्रुप कैप्टन
- यह सीनियर कमीशन्ड रैंक होती है। यह रैंक आर्मी के कर्नल के बराबर होती है।
रैंक : विंग कमांडर
- ग्रुप कैप्टर के बाद दूसरे नंबर की रैंक विंग कमांडर की होती है। हालांकि ये भी सीनियर कमीशन्ड रैंक कहलाती है।
रैंक : स्क्वॉड्रन लीडर
- विंग कमांडर के बाद स्क्वॉड्रन लीडर होते हैं।
रैंक : फ्लाइट लेफ्टिनेंट
- यह भी कमीशन्ड एयर ऑफिसर की रैंक होती है, जो स्क्वॉड्रन लीडर के बाद आते हैं। इन्हें कभी भी सिर्फ लेफ्टिनेंट नहीं कहा जाता।
रैंक : फ्लाइंग ऑफिसर
- यह भी कमीशन्ड रैंक है। इसे एयरक्राफ्ट को उड़ाने वाले ऑफिसर्स के साथ ही ग्राउंड ड्यूटी ऑफिसर और एयर क्रू ऑफिसर्स भी होल्ड कर सकते हैं।
जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर कौन होते हैं...
रैंक : मास्टर वारंट ऑफिसर
- जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर में यह हाइएस्ट रैंक होती है।
रैंक : वारंट ऑफिसर
- यह जूनियर कमीशन्ड ऑफिसर में दूसरी सबसे बड़ी रैंक है।
रैंक : जूनियर वारंट ऑफिसर
- यह अधिकतर टेक्निकल लीडर होते हैं।
नॉन कमीशन्ड ऑफिसर्स कौन होते हैं
रैंक : सार्जेंट
- जूनियर वारंट ऑफिसर के बाद सार्जेंट की रैंक आती है।
रैंक : कॉर्परल
- यह मिलिट्री रैंक है, जो सैनिकों के समूह को देखते हैं।
रैंक : लीडिंग एयरक्राफ्टमैन
- टेक्निकल यह कोई रैंक नहीं है लेकिन यह एक टाइटल है।
रैंक : एयरक्राफ्ट मैन
- यह इंडियन एयरफोर्स की सबसे निचली रैंक है।

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