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बृहदेश्वर शिव मंदिर तंजावुर तमिलनाडु

 

बृहदेश्वर शिव मंदिर,तंजावुर तमिलनाडु 

बृहदेश्वर मंदिर भारत के दक्षिणतम राज तमिलनाडु में स्थित एक प्राचीन और आश्चर्यचकित कर देने वाली हिंदू मंदिर हैं। इस मंदिर को इस तरह से बनाया गया है कि यह बिना नीव का ही खड़ा है। इस मंदिर का निर्माण के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का यूज़ किया गया था।

यहां पर एक बहुत बड़ी नंदी की प्रतिमा भी बनी हुई है। इसके अलावा यह वही मंदिर है जिसकी ऊपरी भाग पर बने गुटबंद की छाया जब सूरज अपने चरम पर होता है तब भी कभी धरती पर नहीं पड़ती है। 


बृहदेश्वर मंदिर का इतिहास – 

बृहदेश्वर मंदिर भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में स्थित एक पौराणिक एवं प्राचीन मंदिर हैं। यह बृहदेश्वर मंदिर तमिलनाडु के तंजावुर में स्थित हिंदू धर्म से जुड़ी एक हिंदू धर्म का प्रमुख धार्मिक स्थल है।

यह बृहदेश्वर मंदिर मुख्य रूप से भगवान शिव को समर्पित हिंदू धर्म के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। इस बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल वंश के द्वारा करवाया गया था। चोल वंश के द्वारा इस विदेश्वर मंदिर का निर्माण 1010 ईस्वी के दौरान करवाया गया था। इस मंदिर में भगवान शिव की नृत्य की मुद्रा में स्थित मूर्ति है जिसे नटराज के नाम से जाना जाता है। इस बृहदेश्वर मंदिर को राजेश्वर मंदिर राजराजेश्वर और पेरिया कोविल के नाम से भी जाना जाता है।

यह मंदिर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों की वजह से काफी प्रमुख एवं प्रसिद्ध हैं जिसकी वजह से इसे यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में भी शामिल किया गया है। इस मंदिर के निर्माण के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का उपयोग करते हुए इसे बनाया गया है।

इस बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण चोल वंश के शासक महाराजा राजाराज प्रथम के द्वारा 1000 से 1009 ईस्वी के दौरान करवाया गया था। इस मंदिर का निर्माण करने में तकरीबन 5 साल का समय लगा था, इन्हीं के नाम पर इस मंदिर का नाम राजराजेश्वर मंदिर रखा गया था।

इस बृहदेश्वर मंदिर में नंदी बैल की बहुत बड़ी प्रतिमा को भी बनाया गया है जिसका वजन तकरीबन 20 टन बताया जाता है। आपको बता दें महाराज राजराज प्रथम भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे वह इस बृहदेश्वर मंदिर के अलावा भी कई शिव मंदिरों का निर्माण करवाया है।

बृहदेश्वर मंदिर की वास्तुकला – 

बृहदेश्वर मंदिर भारत के तमिलनाडु राज्य में तंजावुर में स्थित एक भारत की प्रमुख मंदिर हैं। इस मंदिर की वास्तुकला काफी खूबसूरत एवं आश्चर्यचकित कर देने वाली है। इस मंदिर को बनाने के लिए तकरीबन 130000 टन से भी अधिक ग्रेनाइट का उपयोग करते हुए इस मंदिर का निर्माण किया गया है, लेकिन इस मंदिर को बनाने के लिए ग्रेनाइट कहां से आया इसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली।

इस मंदिर का प्रमुख आकर्षण 216 फीट लंबा टावर हैं जो कि इस मंदिर के गर्भ गृह के ऊपर देखा जा सकता है। जब पर्यटक यहां पर आते हैं तो यह टावर काफी दूर से ही दिख जाता है। इसके अलावा यहां पर एक और प्रमुख चीज है वह है नंदी बैल की प्रतिमा जिसकी ऊंचाई तकरीबन 2 मीटर लंबी और 6 मीटर के साथ चौड़ाई में ढाई मीटर हैं यह प्रतिमा तकरीबन 20 टन वजन का है।

इसके अलावा इस मंदिर की सबसे आश्चर्यचकित करने वाली बात यह है कि इस मंदिर की गुटबंद की छाया जब सूरज अपने चरम पर होता है तो तब भी कभी भी जमीन पर नहीं पड़ती है। इस रहस्य को जानने के लिए दुनिया भर से कई वास्तुकार और शिल्पकार भी आए। यह मंदिर वर्तमान समय में यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में शामिल हैं।

इस मंदिर से जुड़ी एक और बात बताई जाती है इस मंदिर के ऊपरी गुटबंद को तकरीबन 80 टन वजन के एक पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर से जुड़ी एक और आश्चर्यचकित करने वाली बात बताई जाती है कि यह बृहदेश्वर मंदिर बीना नीव का ही खड़ा है। यह कैसे संभव है इसके बारे में कोई कुछ नहीं बताता है।

बृहदेश्वर मंदिर का रहस्य –

तमिलनाडु राज्य में स्थित इस बृहदेश्वर मंदिर से जुड़ी कई आश्चर्यचकित कर देने वाले रहस्य हैं, यह जानने और देखने के लिए लोग भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के अलावा विदेशों से भी काफी अधिक संख्या में आया करते हैं। चलिए हम मंदिर से जुड़ी रहस्यों को एक एक कर विस्तार से जानने का प्रयास करते हैं –

`बृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बनी गुटबंद की छाया धरती पर नहीं पड़ती

बृहदेश्वर मंदिर पर इस तरह से बनाया गया है कि इस मंदिर के ऊपरी सिरे पर बना हुआ गुटबंद जिसकी छाया पृथ्वी पर नहीं पड़ती भले ही सूर्य का प्रकाश किसी भी दिशाओं से इस पर पड़े। दोपहर के समय में भी इस मंदिर के नीचे के कुछ हिस्से की परछाइयां जमीन पर दिखती है लेकिन इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बने गुटबंद की परछाइयां कभी भी धरती पर नहीं बनती। इस घटना से जुड़ा रहस्य आज भी बना हुआ है। इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर 80 टन का ग्रेनाइट का बना हुआ गुटबंद जिसके ऊपर एक स्वर्ण कलश को भी स्थापित किया गया है।

बृहदेश्वर मंदिर बिना नीव के कैसे टिका हुआ है ?

इस बृजेश्वरी मंदिर के सबसे आश्चर्यजनक करने वाली खास बात यह है कि इस मंदिर को बनाने के लिए नीव को नहीं बनाया गया है। 

सबको आश्चर्यचकित करती है कि आखिर बिना नीव के यह 130000 टन ग्रेनाइट से बना मंदिर अखिर खड़ी कैसे हैं।

मंदिर के ऊपरी हिस्से पर बड़ा गुंबद

इस बृहदेश्वर मंदिर के ऊपरी हिस्से केवल एक ही काफी बड़ा लगभग 80 टन वजन का एक विशालकाय पत्थर से बना है। इसके बारे में आश्चर्य बता यह है कि जिस समय इस मंदिर का निर्माण हुआ था उस समय तो ना ही क्रेन जैसे कोई मशीन थी और नहीं और कुछ तो इतना बड़ा पत्थर को इस मंदिर के ऊपरी हिस्से पर रखा कैसे गया होगा।

बृहदेश्वर मंदिर का अद्भुत चित्रकारी और रंग

इस बृहदेश्वर मंदिर के दीवारों पर विभिन्न प्रकार के देवी-देवताओं की छोटी-छोटी मूर्तियों को नकाशा गया है इसके अलावा इस मंदिर का शिखर ऐसा लगता है कि उससे किसी रंग से पोता गया है लेकिन वह किसी प्रकार का रंगा नहीं गया है वह एक पत्थर का वास्तविक रंग है। यह भी अपने आप में एक अनूठे चमत्कार से कम नहीं है।

मंदिर की सबसे आश्चर्यजनक वाली सिस्टम –

इस बृहदेश्वर मंदिर को ग्रेनाइट के शिलाखंड द्वारा बनाया गया है लेकिन इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस शिलाखंड को आपस में जोड़ने के लिए किसी भी गूंध या चुना या सीमेंट से नहीं चिपकाया गया है बल्कि इन पत्थरों को आपस में इस तरह से फिक्स किया गया है कि यह मंदिर देखने से लगता है कि इसे किसी केमिकल से चिपकाया गया होगा।

वृद्धेश्वर मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य

  1. बृहदेश्वर मंदिर का निर्माण तकरीबन 130000 ग्रेनाइट से किया गया है।
  2. इस बृहदेश्वर मंदिर को बनाने के लिए ग्रेनाइट कहां से लाया गया है इसके बारे में आज तक कोई जानकारी नहीं है।
  3. इस बृहदेश्वर मंदिर को चोल वंश के शासकों द्वारा बनवाया गया था।
  4. चोल वंश के शासकों द्वारा इस बृहदेश्वर मंदिर की तरह कई अन्य मंदिरों का निर्माण करवाया गया था।
  5. इस वृहदेश्वर मंदिर को यूनेस्को विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है।
  6. इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि इस मंदिर की गुंबद की छाया धरती पर नहीं पड़ती हैं।
  7. इस मंदिर के ऊपरी हिस्से के गोपुर के शीर्ष पर करीब 80 टन वजन का एक पत्थर रखा गया है जिसे कैप स्टोन कहा जाता है।
  8. इस वृहदेश्वर मंदिर के परिसर में नंदी बैल की एक विशालकाय प्रतिमा को भी स्थापित किया गया है, जो देखने में काफी ज्यादा अद्भुत और आकर्षक लगता है।


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